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शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में, PSU बैंकिंग शेयरों में बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से दबाव

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भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में खुले, PSU बैंकिंग शेयरों में बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बाजार पर दबाव बना रहा।

हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में कमजोर शुरुआत देखने को मिली। घरेलू बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में खुले, जिससे निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बन गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 200 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,050 के स्तर से नीचे चला गया।

बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) के शेयरों में भारी बिकवाली के कारण देखा गया। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, सेंसेक्स 208 अंक से अधिक गिरकर लगभग 77,094 के स्तर पर पहुंच गया, वहीं निफ्टी भी गिरावट के साथ 24,050 के नीचे कारोबार करता दिखा। हालांकि, कुछ समय बाद बाजार में हल्की रिकवरी भी देखने को मिली।

सुबह के कारोबार में रुपये में भी कमजोरी दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 24 पैसे टूटकर 94.39 के स्तर पर पहुंच गया, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार पर भी दबाव बना रहा।

विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में यह गिरावट कई वैश्विक और घरेलू कारणों का परिणाम है। सबसे बड़ा कारण भू-राजनीतिक तनाव को फिर से बढ़ना बताया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। इससे महंगाई और चालू खाता घाटे पर भी दबाव बढ़ सकता है।

इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर असर डाल रही है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने एक ही दिन में हजार करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की है, जिससे बाजार में नकारात्मक दबाव बना हुआ है।

सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई, जबकि कुछ आईटी और मिडकैप शेयरों में हल्की खरीदारी के कारण सीमित बढ़त दर्ज हुई। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक और अन्य प्रमुख बैंकिंग शेयरों में कमजोरी देखी गई, जबकि कुछ टेक और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में मामूली बढ़त रही।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल भारतीय शेयर बाजार एक कंसोलिडेशन फेज में है, जहां वैश्विक संकेतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हो रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगी।

कुछ मार्केट एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में तेजी के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से फिलहाल दूरी बना रहे हैं। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रहेगी और बाजार में जल्द ही रिकवरी देखने को मिल सकती है।

कुल मिलाकर, वर्तमान समय में बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

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